Monday, September 20, 2010

इतिहास परीक्षा थी ...................उस दिन .


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इतिहास परीक्षा थी उस दिन चिंता से ह्रदय धड़कता था ,
थे शगुन बुरे घर से चलते वक़्त दाया नयन फड़कता था।

जितने प्रशन मैंने याद किये उनमेसे आधे याद हुए ,
आधे में से बचे हुए    स्कूल जाते जाते बर्बाद हुए ।
तुम बीस मिनट हो लेट गेट पर द्वारपाल चिल्लाई ,
मै मेल ट्रेन की तरह दौड़ कर कक्षा के भीतर आई ।

पेपर हाथो मे थाम लिया आंखे मूंदी मन झूम गया ,
पढ़ते ही छाया अन्धकार चक्कर आया सर घूम गया ।
था सौ नम्बर का पेपर मुझको २ की भी आस नहीं ,
चाहे सारी दुनिया उलटे मै हो सकती थी पास नहीं ।

प्रश्नपत्र  देने  वालो क्या मुह लेकर दे उत्तर हम ,
जोचाहे  लिखदूँ  मेरी मर्जी ये पेपर है या एटम बम्ब .
फिर आँख मूँद के बैठ गयी बोली भगवन द्याकरो ,
इनसब प्रश्नों के उत्तर मेरे दिमाक मे जल्दी भरदो।

द्रोपदी समझ के अब मेरा भी चीर बढाओ तुम ,
मै विष खा के मर जाऊँगी जो जल्दी ना आये तुम ।
आकाश फटा और अम्बर से  आई  आवाज तभी ,
मुर्ख व्यर्थ क्यों रोती है जरा आंख उठा के देख यही ।

गीता कहती है कर्म करो फल की चिंता मत किया करो ,
जो कुछ भी याद रहा है वो पेपर मे बस लिख दिया करो ।
मेरे अंतर मनके द्वार खुले पेपर पे यूँ चली कलम चंचल ,
जिस तरह चलता है बंजर धरती पर किसान का हल ।

लिखदिया पानीपत का दूसरा युद्ध हुआ था सावन में ,
 जापान जर्मनी युद्ध हुआ था अठारासौ सत्तावन में ।
लिखा दिया महात्मा बुद्ध अपने गाँधी जी के चेले थे ,
बचपन मे वो गाँधी के संग आंख मिचौली खेले थे ।

हुमायूँ का बेटा था अकबर और उसका पोता था बाबर ,
गुप्त वंश मे राज किया था रज़िया बेगम ने भारत पर ।
तैमूर लंग रोज उठते ही दो घंटे नाच  नाचता था
औरंगजेब रंग मे आकार औरों की जेब काटता था ।

लिखा दिया मोहम्मद गौरी ने राणा को रण मे हराया था ,
अमरीका से हिंदमहासागर ट्रांसपोर्ट कर के मँगवाया था।

इस तरह अनोखे भावों के फूटे अन्दर से फव्वारे ,
जो जो सवाल पूछे नहीं उनके भी उत्तर दे डाले ।
हो गए परीक्षक पागल से मेरे उत्तरों को देख देख ,
बोले इन सारे बच्चों मे बस होनहार है यही एक ।

बाकी सब पेपर फेंक दिए मेरे सब उत्तर छाँट लिए ,
जीरो नम्बर दे के बाकी सारे नम्बर काट लिए ।