Saturday, September 25, 2010

फ़र फ़र फहरे आसमान में आज तिरंगा प्यारा,

फ़र फ़र फहरे आसमान में आज तिरंगा  प्यारा,

चम् चम् चमके पंच शील का नभ में तेज सितारा................................................
झूमती गंगा यमुना और बहती है कावेरी ,
बरफ की चुनरी ओढ़ खड़ी है धरती मैया मेरी .
ये गाँधी    का देश यहाँ पर हर मानव बलिदानी ,
हमको आती है अपने पुरखों की बात निबाहनी
सदियों से कहलाता है सहयोग का देश हमारा .
फ़र फ़र फहरे आसमान में ............................


सच है लाल बहादुर सा धरती पर लाल नहीं था
गाँधी नेहरू सा बलिदानी और ना कोई हुआ था
इंदिरा गाँधी  को खो कर चहरे पे आइ उदासी .
मिलकर संकट को सह लेंगे हम सब भारत वासी.
अब स्वतंत्र अनन्त वर्षो तक रहेगा देश हमारा

फ़र फ़र फहरे आसमान में ...........................
आस पास के चोर लुटेरों तुमसे कौन डरेगा ,
सत्य अहिंसा से मानव अपना निर्माण करेगा .
बढ़ता चरण प्रगति के पथ पर रोके नहीं रुकेगा
अडिग हिमालय सा प्रहरी ताकत से नहीं झुके गा ,
अपनी धरती पर गैरों का हक हमको नहीं गवारा .
फ़र फ़र फहरे आसमान में ...........................
Remembering  a small thing related to  this poem.It was  Jan 2003 .
A  patriotic songs competition was announced for Republic Day in our school.
Then all  classes  started practicing for the occasion.
I also wrote this song and started to teach children . our schools[iisriyadh.com] building is 3 storied in E shape.
We had a shade in between 2 blocks . . Children were singing.
Principals room was there on 1st floor.we were practicing below the principals room .His  PA came down to ask who is teaching and who wrote this song and which class is ?It was nothing but  I got a nice felling to hear this. later my class got 1st prize ,after that so many times it was held in various occasions...and in our Indian embassy too.

1 comment:

  1. फ़र फ़र फहरे असमान में आज तिरंगा प्यारा

    बहुत बढ़िया..

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