Saturday, April 4, 2020

हरेक गली के हरेक द्वार पर मिलकर दीप जलाओ
अंधकार से भरी रात मे आशा की किरन ले आओ!!
आओ मिलकर दीप जलाओ .
एक दीप मेरा भी शामिल कर लो गर चाहो
अनजाने सारे रिश्तों कि मिलके डोर बनाओ !
एक हाथ मेरा भी शामिल कर लो गर चाहो
रुकती थमती सान्सो मे फ़िर से स्पन्द जगाओ
आओ मिलकर दीप जलाओ ..
खिलने से पहले जो कलिया तूफ़ानो से टूट गई
इतने मिले प्रहार जगत मे मुस्काना भी भूल गई
उन आँखो मे उम्मीदों की कोई आस जगाओ
एक आस मेरी भी शामिल कर लो गर चाहो.।
आओ मिलकर दीप जलाओ ..
उखडी सान्से बुझते जीवन की आस अभी है बाकी
कोइ आए हमे बचाए सब ताक रहे सङ्गी साथी
नयनो के पानी को थमने की उम्मीदें हे फ़िर जागी
घोर निराशा मे बढ़ने की हिम्मत अब भी हे बाकी।
आओ मिलकर दीप जलाओ ..
निराधार मन सोच रहा क्या दूर अभी सन्ध्या बेला
बुझती लो सी जिन्दगी की ये कैसी ईश्वर लीला.
स्वार्थ के संम्बधों का विश्वास ह्रदय ने झेला
सब के दिलो मे ज्योत जलाने आया एक अलबेला ।
आओ मिलकर दीप जलाओ ..

Thursday, April 2, 2020